छठ पूजा विधि (Chhath Puja Vidhi)
छठ पूजा भगवान सूर्य और छठी मइया की उपासना का सबसे कठिन और पवित्र महापर्व है। यह चार दिनों तक चलता है।
१. प्रथम दिन: नहाय-खाय (Nahay-Khay)
इस दिन व्रती स्नान करके सात्विक भोजन (कद्दू-भात) ग्रहण करते हैं। घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
२. द्वितीय दिन: खरना (Kharna)
इस दिन व्रती दिन भर उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ की खीर और रोटी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद ३६ घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
३. तृतीय दिन: संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)
इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- बांस के सूप में फल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद सजाया जाता है।
- शाम को नदी या तालाब के किनारे जाकर कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है।
सूर्य मंत्र
४. चतुर्थ दिन: उषा अर्घ्य (Usha Arghya)
अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- सुबह सूर्योदय से पहले घाट पर पहुंचकर जल में खड़े होकर प्रतीक्षा की जाती है।
- उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद वितरण होता है और व्रत खोला जाता है (पारण)।
सूर्य अर्घ्य मंत्र
हे सहस्रों किरणों वाले, तेज के पुंज, जगत के स्वामी दिवाकर! मुझ भक्त पर अनुकम्पा करें और मेरा अर्घ्य स्वीकार करें।
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