दशहरा पूजा विधि (Dussehra Puja Vidhi)
दशहरा या विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था और देवी दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था।
१. शस्त्र पूजा (Shastra Puja)
क्षत्रियों और योद्धाओं के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन अपने कार्य में उपयोग आने वाले उपकरणों और शस्त्रों की पूजा की जाती है।
विधि:
- शस्त्रों को साफ करके एक चौकी पर रखें।
- उन पर गंगाजल छिड़कें।
- हल्दी, कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
- फूल चढ़ाएं और धूप-दीप दिखाएं।
२. शमी पूजा (Shami Puja)
विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि पांडवों ने अपने अस्त्र इसी वृक्ष में छुपाए थे।
विधि:
- शाम के समय शमी वृक्ष के पास जाएं।
- वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
- दीपक जलाएं और वृक्ष की परिक्रमा करें।
शमी प्रार्थना मंत्र
हे शमी! तुम पापों का नाश करने वाली हो, तुम अर्जुन के धनुष को धारण करने वाली हो और श्री राम को प्रिय हो। मेरी यात्रा को निर्विघ्न और मंगलमय बनाओ।
३. विजय मंत्र (Vijay Mantra)
इस दिन सफलता प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है:
विजय मंत्र
संबंधित पाठ

Dussehra Vrat Katha | दशहरा व्रत कथा (Dussehra Vrat Katha)
विजयादशमी के अवसर पर पढ़ी जाने वाली दशहरा व्रत कथा, शमी पूजा और रावण वध का महत्व।
पढ़ें →
Ram Raksha Stotram | श्रीरामरक्षास्तोत्रम्
Ram Raksha Stotram lyrics in Hindi. भगवान श्रीराम की स्तुति और रक्षा के लिए अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र।
पढ़ें →इस पूजा विधि को साझा करें
भक्ति का प्रसार करें
हमारे व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें
आरती, चालीसा और दैनिक अनुष्ठानों की समय पर अपडेट सीधे अपने फोन पर प्राप्त करें।
अभी जुड़ें