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Dussehra Vrat Katha | दशहरा व्रत कथा (Dussehra Vrat Katha) - Katha Bhagwan Bhakti

Dussehra Vrat Katha | दशहरा व्रत कथा (Dussehra Vrat Katha)

॥ दशहरा व्रत कथा ॥

दशहरा या विजयादशमी का त्योहार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

रावण वध की कथा: त्रेतायुग में लंकापति रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। भगवान श्री राम ने वानर सेना के साथ लंका पर आक्रमण किया। नौ दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद, अश्विन शुक्ल दशमी के दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध किया। इसी खुशी में हर साल दशहरा मनाया जाता है।

शमी पूजा का महत्व: महाभारत काल में जब पांडवों को बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास मिला, तब उन्होंने अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष पर छुपा दिए थे। अज्ञातवास समाप्त होने के बाद विजयादशमी के दिन उन्होंने शमी वृक्ष की पूजा की और अपने शस्त्र पुनः प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने कौरवों पर विजय प्राप्त की। इसलिए इस दिन शमी वृक्ष की पूजा और उसके पत्तों को ‘सोना’ समझकर बांटने की परंपरा है।

महिषासुर मर्दिनी: इसी दिन देवी दुर्गा ने नौ रात्रि और दस दिनों के युद्ध के बाद महिषासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए इसे विजयादशमी (विजय की दशमी) कहा जाता है।

पूजा विधि: दशहरा के दिन शस्त्र पूजा और शमी पूजा का विशेष महत्व है। विस्तार से जानने के लिए नीचे दी गई पूजा विधि देखें:

Dussehra Puja Vidhi | दशहरा पूजा विधि

Dussehra Puja Vidhi | दशहरा पूजा विधि

विजयादशमी के दिन की जाने वाली विशेष पूजा विधि, जिसमें शस्त्र पूजा और शमी पूजा का पूर्ण विधान दिया गया है।

पढ़ें →

(कथा समाप्त)

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