नवरात्रि व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में पीठत नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। वे माँ दुर्गा के परम भक्त थे। उनकी एक पुत्री थी जिसका नाम सुमति था। ब्राह्मण नियमपूर्वक माँ दुर्गा की पूजा और हवन किया करते थे, सुमति भी उसमें भाग लेती थी।
एक बार सुमति अपनी सहेलियों के साथ खेलने चली गई और पूजा में शामिल नहीं हुई। इससे उसके पिता को क्रोध आ गया और उन्होंने कहा कि मैं तेरा विवाह किसी कोढ़ी या दरिद्र मनुष्य से करूँगा। सुमति ने धैर्य से उत्तर दिया कि हे पिता! जो मेरे भाग्य में होगा, वही मुझे प्राप्त होगा।
ब्राह्मण ने क्रोध में आकर सुमति का विवाह एक कोढ़ी के साथ कर दिया। सुमति अपने पति के साथ जंगल में चली गई। वहां उसकी भक्ति और धैर्य को देखकर माँ भगवती प्रसन्न हुईं और प्रकट होकर सुमति को वरदान मांगने को कहा। सुमति ने अपने पति के रोग मुक्ति का वरदान माँगा। माँ दुर्गा ने उसे उसके पिछले जन्म के पुण्य कर्मों का फल दिया और उसके पति को स्वस्थ और सुंदर बना दिया।
माँ दुर्गा ने सुमति को बताया कि उसने पिछले जन्म में निस्वार्थ भाव से नवरात्रि का व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उसे यह सुख प्राप्त हुआ है। तब से ही नवरात्रि के व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया।
पूजा विधि: शारदीय नवरात्रि की विस्तृत और चरणबद्ध पूजा विधि के लिए यहाँ देखें:

Sharad Navratri Puja Vidhi | शारदीय नवरात्रि पूजा विधि
शारदीय नवरात्रि की सरल और संपूर्ण पूजा विधि। घटस्थापना से लेकर कन्या पूजन तक की पूरी जानकारी।
पढ़ें →(कथा समाप्त)
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