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सभी मंत्र

11 संग्रह

गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, महालक्ष्मी मंत्र और सभी पावन वैदिक व पौराणिक मंत्रों का अर्थ, महत्व और जप विधि पढ़ें।

त्वरित फ़िल्टर:

भगवान धन्वन्तरि मंत्र

Dhanvantari Mantra

भगवान धन्वन्तरि का प्रभावशाली मूल मंत्र 'ॐ धन्वन्तरये नमः' अर्थ और लाभ सहित।

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गायत्री मंत्र

Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र हिंदी में लिरिक्स और अर्थ के साथ।

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कुबेर मंत्र

Kuber Mantra

धन के स्वामी कुबेर देव का अमोघ मंत्र 'ॐ यक्षाय कुबेराय...' हिंदी में अर्थ और जाप विधि के साथ।

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महामृत्युंजय मंत्र

Maha Mrityunjaya Mantra

महामृत्युंजय मंत्र हिंदी में लिरिक्स और अर्थ के साथ।

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महालक्ष्मी मंत्र

Mahalakshmi Mantra

माँ लक्ष्मी का सबसे शक्तिशाली बीज मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये...' हिंदी में अर्थ, लाभ और जप विधि के साथ।

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नवार्ण मंत्र और सर्वमंगल मांगल्ये

Navarna Mantra and Sarvamangal Mangalye

माँ दुर्गा के सबसे शक्तिशाली मंत्रों - नवार्ण मंत्र और सर्वमंगल मांगल्ये का संग्रह।

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ॐ मणि पद्मे हूँ

Om Mani Padme Hum

ॐ मणि पद्मे हूँ मंत्र हिंदी में लिरिक्स और अर्थ के साथ।

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ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

ॐ नमः शिवाय मंत्र हिंदी में लिरिक्स और अर्थ के साथ।

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शांति मंत्र (ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु)

Shanti Mantra (Om Sarvesham Svastir Bhavatu)

शांति मंत्र (ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु) हिंदी में लिरिक्स और अर्थ के साथ।

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सूर्य मंत्र

Surya Mantra

भगवान सूर्य देव के कल्याणकारी मंत्र, जिसमें 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' और गायत्री मंत्र शामिल हैं। इनके जाप से तेज और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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विजय मंत्र (Vijay Mantra)

Vijay Mantra

विजयादशमी के अवसर पर सफलता और विजय प्राप्ति के लिए जपा जाने वाला 'ॐ अपराजितायै नमः' मंत्र।

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पावन वैदिक एवं पौराणिक मंत्र - गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र एवं जप विधि

सनातन संस्कृति में 'मंत्र' (Mantra) का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। पारंपरिक व्युत्पत्ति के अनुसार 'मननात् त्रायते इति मन्त्रः' — अर्थात् जिसके मनन और चिंतन से मन को संरक्षण प्राप्त हो, वह मंत्र है। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में वर्णित मंत्र पवित्र ध्वनियों और दिव्य भावों के वाहक माने जाते हैं।

हमारे मंत्र संग्रह में आपको वेदों के अत्यंत पूज्य 'गायत्री मंत्र', भगवान शिव के 'महामृत्युंजय मंत्र' व पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय', कुबेर व महालक्ष्मी मंत्र, तथा शांति मंत्रों का संकलन मिलेगा।

मंत्र का जप करने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है। पारंपरिक रूप से 108 मनकों वाली माला (जैसे रुद्राक्ष, तुलसी या स्फटिक) से जप करने का विधान प्रचलित है। ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल में जप करना विशेष रूप से अनुशंसित माना जाता है।

भगवान भक्ति के माध्यम से आप प्रमुख मंत्रों के सही उच्चारण, उनके अर्थ और उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में जान सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मंत्र जाप करने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

पारंपरिक और शास्त्रीय दृष्टिकोण से प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) या संध्याकाल को मंत्र जप के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।

मंत्र जाप कितनी बार करना चाहिए?

परंपरागत रूप से 108 बार (एक माला) जप करने का विधान प्रचलित है। भक्त अपनी सुविधा और संकल्प अनुसार संख्या तय कर सकते हैं।

क्या मानसिक रूप से भी मंत्र जाप कर सकते हैं?

हाँ, कई आध्यात्मिक परंपराओं में मानसिक जप (मन ही मन जपना) को अत्यंत सूक्ष्म, ध्यानपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है।

प्रमुख कीवर्ड एवं विषय

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