॥ आरती (जगदीश) — जगदीश विष्णु ॥
जय जगदीश भगवान, जग में पालन करता।
जय जगदीश भगवान, जय जगदीश भगवान। हरि गुण उच्चारूँ मैं, चरणों में मधुर गान।। जो भक्त गुरुमुख करता, रात्रि दिन ध्यान लगाता। जीवन में सुख समृद्धि, जगदीश कृपा पाता।। जय जगदीश भगवान, जय जगदीश भगवान। ईश्वर अबाध रूप ध्यान, भक्तों पर संतोष दान।।
(आरती समाप्त)
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