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॥ आरती (नारायण) — सर्वरूप नारायण ॥

नारायण सेवा, त्रिवेणी कल्याण बहता।

जय नारायण, जय नारायण, जगदाधार विश्वासी। पतित हरि, भक्त आसान, दशावतार विभूषा। केशव, नारायण, माधव, पुरुषोत्तम अङ्कज। पार्थिव विद्या पालन, अधिकार रखे अविज्जय। कोटि अर्चन में गूँजे शंख, चक्र, कमल औ गदा। नारायण प्रीति पावै जो, सुख पावत सदा।। सदा भक्तों पर प्रकाश, नारायण स्वरूप धारी। हरि नाम से जीवन सकल, मोक्षमार्ग अमितधारी।।

(आरती समाप्त)

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