॥ आरती (गोविंद) — गोविंद रूप ॥
गोविंद की आरती से, ब्रजभूमि रस भरता।
जय गोविंद, जय गोविंद, मुरलीधर महाबली। राधा रमण संग मुरल, बांसुरी तार नवल चाली।। मित्रों पे लड्डू, पेठा, माखन, गोपियाँ आह्लाद। गोविंद नाम की धुन लगे, मोह माया उपशमन।। जय गोविंद गोपाल, जय गोविंद गोपाल। ह्रदय में शांति, मोक्ष धाम, निश्चल विश्वास पाल।।
(आरती समाप्त)
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