॥ आरती (भक्ति) — भक्तिमार्ग की आरती ॥
भक्ति भाव से शिवकाली, मंगल गान सदा गाए।
हरे राम, हरे कृष्ण, भक्ति गीत बजेगा भारी। सुमन दल से अर्पण करें, चरन बिंदु सुमनारी।। आनन्द सागर भक्ति से, भवाशांति शरण मिलें। जीवन साक्षात् सुप्रभात, प्रेम रस में रंग मिलें।। जय भक्ति, जय भक्ति, शरणागत गुण गावे। सच्ची भक्ति रचता जो, फलित मोक्ष अध्याय पावे।।
(आरती समाप्त)
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