Bhagwan BhaktiBhagwan Bhakti
EN|हि
WhatsApp
← वापस मुख्य पृष्ठ पर
Vaibhav Lakshmi Vrat Katha | वैभव लक्ष्मी व्रत कथा - Lakshmi Bhagwan Bhakti

Vaibhav Lakshmi Vrat Katha | वैभव लक्ष्मी व्रत कथा

॥ श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा ॥

यह व्रत सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए शुक्रवार को किया जाता है। माँ लक्ष्मी के आठ स्वरूपों की कृपा से भक्त का जीवन धन-धान्य से भर जाता है।

व्रत कथा

बहुत समय पहले एक शहर में शीला नाम की एक स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। शीला बहुत ही धार्मिक, सुशील और संतोषी स्वभाव की थी। उसका पति भी विवेकी और ईमानदार था। दोनों की गृहस्थी बहुत सुखमय थी।

अचानक शीला का भाग्य बदला और उसका पति बुरी संगति में पड़ गया। उसने अपना सारा धन जुआ और बुरी आदतों में गंवा दिया। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई कि वे दाने-दाने को मोहताज हो गए। शीला बहुत दुखी रहने लगी, लेकिन उसने भगवान पर विश्वास नहीं छोड़ा।

एक दिन दोपहर को शीला के दरवाजे पर एक वृद्ध महिला (माँ लक्ष्मी का स्वरूप) आई। शीला ने उन्हें आदर के साथ बैठाया। वृद्धा ने शीला के दुख का कारण पूछा, तो शीला ने अपनी सारी व्यथा सुना दी। वृद्धा ने उसे सांत्वना देते हुए कहा, “बेटी! तू माँ लक्ष्मी का ‘वैभव लक्ष्मी व्रत’ कर। इससे तेरी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।” उन्होंने शीला को व्रत की विधि समझाई।

अगले शुक्रवार को शीला ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखा। शाम को विधि-विधान से पूजा की और खीर का प्रसाद बनाया। प्रसाद खाते ही पति के व्यवहार में बदलाव आने लगा। उसने मेहनत से धन कमाना शुरू किया और धीरे-धीरे घर में पहले जैसी सुख-शांति लौट आई।

शीला ने 21 शुक्रवार तक यह व्रत किया और अंत में विधिपूर्वक उद्यापन किया। उसने सौभाग्यवती स्त्रियों को प्रसाद दिया और व्रत की पुस्तकें भेंट की। माँ वैभव लक्ष्मी की कृपा से शीला का घर धन-वैभव से भर गया।

(कथा समाप्त)

इस कथा को साझा करें

भक्ति का प्रसार करें

WhatsApp

हमारे व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें

आरती, चालीसा और दैनिक अनुष्ठानों की समय पर अपडेट सीधे अपने फोन पर प्राप्त करें।

अभी जुड़ें
AaAa