दोहा
जैसे अटल हिमालय और जैसे अडिग सुमेर। ऐसे ही तुम अमर हो कृपा करो कुबेर॥ नाथ अलकापुरी के तुम हो यक्ष राज। धनतेरस के शुभ दिन सिद्ध करो सब काज॥
चौपाई
जय कुबेर जय यक्ष राज। महाराज प्रभु राखो लाज॥ शिव के तुम हो परम पुनीत। सब भक्तों के सच्चे मीत॥
नव निधियों के दाता तुम। अष्ट सिद्धि के स्वामी तुम॥ अल्कापुरी है वास तुम्हारा। सब देवों ने तुमको पुकारा॥
धनतेरस पर जो गुण गावै। सो नर निश्चय ही धन पावै॥ विष्णु प्रिया लक्ष्मी के संगा। राखो प्रभु भक्ति का रंगा॥
जो कोई संकट तुम पर आवे। कुबेर नाम लेते मिट जावे॥ राक्षस यक्ष सब तुमको मानें। सब जग तुमको दाता जानें॥
धन वैभव की कमी न होवे। जो नर आपकी सेवा होवे॥ कृпа करो प्रभु यक्ष राज। पूरण करो हमारे काज॥
दोहा
कुबेर चालीसा जो पढ़ै, प्रेम सहित मन लाय। सकल मनोरथ सिद्ध हों, संकट दूर नशाय॥
(कुबेर चालीसा समाप्त)
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