॥ आरती (विष्णु) — पालनकर्ता विष्णु ॥
शिवपुत्र शंखचक्रधर, विष्णु सेतु धारक।
जय विष्णु, जय विष्णु, जगत पालन करने वाला। विष्णु त्रिलोकेश, लक्ष्मी पति, सदा भक्ता परवाला।। शुभकुमार कवच धारण, हरि गुण लोक उजियाला। गगनाभिरुप चरण, गले मणि, भजन गूंज उच्चारा। नारायण, माधव, अधिराज, कल्याण दिवस मनावै। सदा सदा आशीर्वाद देह, भक्त संग हृदय भूषा।। जय विष्णु, जय विष्णु, प्रताप दिनान दीप्त एव। अग्नि जल गंगा सब, विष्णु चरण स्पर्श परम सुखवे।।
(आरती समाप्त)
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