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Jagadguru Aarti | जगद्गुरु आरती - Aarti Bhagwan Bhakti

Jagadguru Aarti | जगद्गुरु आरती

॥ आरती (जगद्गुरु) — गुरु आराधना ॥

जगद्गुरु की आरती, ज्ञान दीप जगाए बिना।

जय जगद्गुरु, जय जगद्गुरु, शिष्यकोटि धन्य। गुरु चारू ज्ञान दाता, शरणागत हरि सरस्वती।। ज्ञानदीप कर जो प्रज्वलित, अज्ञान अंधियारा जड़। गुरु चरणजले सनेह, जी भर हरि शरण तट॥ जय जगद्गुरु, जय जगद्गुरु, भक्ति रस अमोघा। प्रेम प्रकाश जगमगाए, असीम कृपा शरण होगा।।

(आरती समाप्त)

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