॥ आरती श्री सूर्य देव जी ॥
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिभुवन प्राण॥ ॐ जय सूर्य भगवान…
भानु सप्त अश्व रथ साजे, श्वेत चामर ढरै। कर में पद्म सुशोभित, तेज सकल जग भरै॥ ॐ जय सूर्य भगवान…
संध्या प्रातः अर्घ्य चढ़ाकर, जो जन ध्यान धरै। आयु प्रज्ञा बल बढ़ता, दुःख दारिद्र हरै॥ ॐ जय सूर्य भगवान…
रोग शोक सब मिटते, पातक दूर भगे। सूर्य कृपा जिस पर हो, भाग्य उसका जागे॥ ॐ जय सूर्य भगवान…
नारायण स्वरूप तुम, तेज पुंज अविनाशी। भक्तों के संकट काटो, हे तिमिर विनाशी॥ ॐ जय सूर्य भगवान…
सूर्य देव की आरती, जो कोई जन गावे। सुख सम्पत्ति मनवांछित, पाकर मोक्ष पावे॥ ॐ जय सूर्य भगवान…
(आरती समाप्त)
इस आरतियां को साझा करें
भक्ति का प्रसार करें
हमारे व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें
आरती, चालीसा और दैनिक अनुष्ठानों की समय पर अपडेट सीधे अपने फोन पर प्राप्त करें।
अभी जुड़ें