॥ आरती (छठी मैया) — सूर्य की आराधना ॥
छठी मैया की आरती, गंगा किनारे धूम मचा।
जय छठी मैया, जय छठी मैया, भुवन की राजा। सूर्य के चरण पकड़े, दीपक में व्रत का साजा।। अरघ्य चढ़ते कंचन में, घाटों पर सुमन झरते। भक्ति भाव तरे छठी मैया, संकट सारे हटते।। जय छठी मैया, जय छठी मैया, व्रत का पुण्य सागर। भूषण ले आओ भक्त जन, करे जीवन उजागर।।
(आरती समाप्त)
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