Bhagwan BhaktiBhagwan Bhakti
EN|हि
WhatsApp
← वापस मुख्य पृष्ठ पर
Keelak Stotram | कीलक स्तोत्रम् - Stotram Bhagwan Bhakti

Keelak Stotram | कीलक स्तोत्रम्

कीलक स्तोत्रम् (Keelak Stotram)

कीलक स्तोत्रम् दुर्गा सप्तशती का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। यह पाठ के प्रभाव को जागृत करने वाला ‘कीलक’ यानी ताला खोलने के समान माना जाता है।

विनियोग: ॐ अस्य श्रीकीलकस्तोत्रमन्त्रस्य शिव ऋषि:, अनुष्टुप् छन्द:, महासरस्वती देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतये सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोग:।

स्तोत्रम्: ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे। श्रेय:प्राप्तिनिमित्ताय नम: सोमार्धधारिणे॥

सर्वमेतद्विजानीयान्मन्त्राणामभिकीलकम्। सोऽपि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्पर:॥

सिद्ध्यन्त्युच्चाटनादीनि वस्तूनि सकलान्यपि। एतेन स्तुवतां देवी स्तोत्रमात्रेण सिद्ध्यति॥

न मन्त्रो न औषधं तत्र न किञ्चिदपि विद्यते। विना जाप्येन सिद्ध्येत सर्वमुच्चाटनादिकम्॥

(स्तोत्रम् समाप्त)

इस स्तोत्रम को साझा करें

भक्ति का प्रसार करें

WhatsApp

हमारे व्हाट्सएप चैनल से जुड़ें

आरती, चालीसा और दैनिक अनुष्ठानों की समय पर अपडेट सीधे अपने फोन पर प्राप्त करें।

अभी जुड़ें
AaAa