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Murugan Aarti | मुरुगन/कार्तिकेय आरती - Aarti Bhagwan Bhakti

Murugan Aarti | मुरुगन/कार्तिकेय आरती

॥ आरती (मुरुगन) — कार्तिकेय विजय ॥

मुरुगन देवतम, शम्भु पुत्र, शिवशक्ति वृन्दावन।

जय मुरुगन, जय मुरुगन, सुपुत्र शस्त्र धारी। सक्थी स्वरूप उस्तुक, कमल चरण छवि भारी।। शंखचक्र, दिव्य तरंग, सिंह वाहन पर स्थित। अशोक वाटिका गुन गान, वेल्लु को मारते निकर्षित।। भक्त गान करे विग्रह, विजय प्राप्ति अविरल। ब्राम्हण, क्षत्रिय, शूद्र तीनों को देती शौर्य संबल।। जय मुरुगन, जय मुरुगन, विजय चक्र पताका। कृपा करो भक्तों पर, कल्याण सागर तटाका।।

(आरती समाप्त)

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