॥ आरती (जगदम्बा) — जग जननी देवी ॥
है जगदम्बा माँ, त्रिपुरी तुळजाबाई।
जय जगदम्बा देवी, जगत पालिका माँ। नारायण रुप निरंजनी, भक्तध्यान बंधन अग्नि धाम।। सूर्य चंद्र की रश्मि से, चतुर्दिक प्रकाश अनुबाँध। सात सागर पाताल तक, जगदम्बा की महिमा गूंजे ध्वजा।। भक्त उपासना टेकें जो, हर दुःख से मुक्ति पावें। त्रिपुरारि वज्रमाल से, अमर चिरंजीवी बनावें।। जय जगदम्बा, जय जगदम्बा माँ। शक्ति गान गाए जग, मां का जयघोष आए धाम।।
(आरती समाप्त)
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