॥ आरती (संतोषी माता) — सरल भक्ति की देवी ॥
यह आरती संतोषी माता को समर्पित है, जो सरलता से प्रसन्न होती हैं।
आरती संतोषी माता की, आरती संतोषी माता की। जो कोई ध्यावे माता को, मनोकामना पूरी होती।।
चने के दाने ढूंढ़े माता, खीर के भोग लगावें। भक्त जन को सुख दिलवावें, संकट से बचावें। फलों से प्रसन्न होती हैं, सब कामना पूरी करती हैं।।
दीन दयाल माता सदा, दुःख हर्ता, संकट मोचन। भक्त की प्रार्थना सुनती, कृपा करती संतोषण। चार भाई एक बहु पाकर, सब सुख भोगन में आई। संतोषी माता वरदानी, सकल भक्त की दुःख मिटाई।।
चने के दाने नैवेद्य पायें, सरलता से मन में आयें। व्रत सोमवार रखत भक्त जन, सब सुख पावैं चिर काल। संतोषी माता दीन वत्सले, कृपा करो भक्त निहाल।।
जय जय संतोषी माता, कृपा की सिन्धु। जय जय भक्त वत्सले, सकल कामना सिद्धु। जय जय माता सदा, संकट हर्ता प्रमाण। चने दाने प्रसन्न होकर, सब भक्त करो कल्याण।।
(आरती समाप्त)
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