॥ आरती (हरिपाठ) — संत ज्ञानेश्वर की स्तुति ॥
हरिपाठ की आरती, ज्ञानेश्वर गाथा सुनाए।
जय हरिपाठ, जय हरिपाठ, अभंगो का माला। ज्ञानेश्वरी से गुण गाओ, मन में दीप प्रज्वाला।। सत्प्रेम, सच्ची साधना, धीरज जीवन की धारा। हरिपाठ शरण जो ले, पावें सच्चा सहारा।। जय हरिपाठ, जय हरिपाठ, काल भवद्वार तोड़ें। भक्त के मन में जो जागे, हरि नाम हो गहें।।
(आरती समाप्त)
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