॥ आरती (राघवेंद्र) — दिक्षा प्रताप ॥
राघवेंद्र स्वामी की आरती, भक्तों को मंगल दे।
जय राघवेंद्र स्वामी, भक्तों के शरणदाता। कण्ठ में मणि मुकुट शोभा, चरण चंदन वात।। ज्ञान दीक्षा का जल बहा, पाप हरें प्रभु सदा। सत्संग साधना जो करे, पावै जीवन में उजाला।। जय राघवेंद्र स्वामी, जय जय राघवेंद्र। भक्ति भाव संकल्प करें, प्राप्त करें मंगल केंद्र।।
(आरती समाप्त)
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