॥ आरती (नरसिंह) — नरसिंह स्वरूप ॥
नरसिंह भगवान की आरती, पापहरन भव पारी।
जय नरसिंह नारायण, त्रिलोचन वीर सुंदरी। सिंह वदन, मानव काया, झटित अघ विनाश करी।। हिरण्यकशिपु भूते, नरसिंह बल भूतप्रद। धर्म की रखवाली करे, भक्तन हित बन्ध।। जय नरसिंह, जय नरसिंह, रुद्र मूर्ति तेज महान। भक्तों के हृदय कटरे में, अशुद्धि हरते ध्यान।।
(आरती समाप्त)
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