॥ आरती (साईं बाबा) — अचल पावन के संत ॥
साईं बाबा की आरती, श्रावण शताब्दी बाणी।
जय साईं राम, जय साईं राम, शिरडी वाले प्रसन्नता लाज। साँवरे प्यारे, शरणागतों के भव भय हरता।। द्वारका, पान, धूप, दीप, मूँगफली, गंध रमण। दया नयन साईं माता, दीन-दुखी सब सुख पान।। सत् नाम की धून विस्तार, साधु-भक्तों का ध्याना। साईं बाबा की आरती, स्नेह-अभिलाषा विहान।।
(आरती समाप्त)
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